Thursday, 8 October 2026

नाना पाटेकर : 35 रु की नौकरी से क्रांतिवीर तक

               


                                                                                                                                           दैनिक जनभारत (नई दिल्ली डेस्क)|भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार अपनी खूबसूरती से पहचाने जाते हैं, कुछ लोकप्रियता से और कुछ अभिनय क्षमता से। लेकिन नाना पाटेकर ऐसे अभिनेता थे, जिनकी पहचान किसी एक विशेषता में समेटना बहुत  कठिन है। उनके चेहरे पर सामान्य भारतीय की बेचैनी, उनकी आवाज में व्यवस्था के प्रति आक्रोश, आंखों में संघर्षों की छाया और अभिनय इतना नेचुरल कि दर्शक अक्सर अभिनेता और उसके किरदार के बीच अंतर भूल जाता था।

वह न परंपरागत नायक थे, न फिल्मी दुनिया की चमक-दमक में सहजता से समाने वाले सितारे। उन्होंने अपना रास्ता बनाया और अपनी शर्तों पर चलते रहे।

एक जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में एक मराठी परिवार में जन्म लेने वाले  नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था।

उनके पिता गजानन पाटेकर टेक्सटाइल पेंटर और व्यवसायी थे, जबकि मां निर्मला पाटेकर गृहिणी थीं। नाना ने मुंबई में पढ़ाई की और सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से कमर्शियल आर्ट की शिक्षा हासिल की। पढ़ाई के साथ ही उनका झुकाव कला और अभिनय की ओर बढ़ने लगा था।

 


फिल्मों में आने से पहले नाना ने बतौर कमर्शियल आर्टिस्ट काम किया। आर्थिक संघर्ष के दौर में उन्होंने विज्ञापन एजेंसी में काम करने के साथ फिल्मों के पोस्टर बनाने और दूसरे छोटे-मोटे काम भी किए। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। बाद में रंगमंच उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। नाना ने स्वयं कई मौकों पर बताया कि थिएटर ने उन्हें अभिनय की बारीकियां सीखने और खुद को कलाकार के तौर पर मजबूत बनाने में मदद की।

उनका अभिनय किसी सुविधासंपन्न जीवन की कल्पनाओं से नहीं, बल्कि साधारण मनुष्य के अनुभवों से उपजा प्रतीत होता था। उनके किरदारों में मजदूर की थकान, किसान की विवशता, व्यवस्था से निराश नागरिक का गुस्सा और अस्तित्व के लिए संघर्ष करते मनुष्य की बेचैनी दिखाई देती थी।



थियेटर में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें फिल्मों में आने का मौका मिला। वर्ष 1978 की फिल्म ‘गमन’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म में उनके साथ स्मिता पाटिल भी थीं। नाना के अनुसार, फिल्मों में आने के लिए स्मिता पाटिल ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया था। इसके बाद उन्होंने ‘सलाम बॉम्बे में काम किया।

वो ऐसा दौर चल रहा था कि  उस दौर में नायक के लिये सुंदर चेहरा, आकर्षक व्यक्तित्व, रोमांस और नृत्य लोकप्रिय हीरो की प्रमुख शर्तें थीं। नाना ने इन स्थापित मान्यताओं को चुनौती दी। उन्होंने साबित किया कि अभिनय की असली ताकत चेहरे की बनावट नहीं, चरित्र की विश्वसनीयता होती है।


नाना ने आत्महत्या की वजह से पीड़ित परिवारों की इतनी मदद की कि वो लोगों के लिये मिसाल बन गई। नाना ने हमेशा कहा कि आत्महत्यायें सार्वजनिक विमर्श का विषय बनती हैं, तब लोकप्रिय कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए? नाना ने अपने ढंग से इसका उत्तर दिया। उन्होंने दिखाया कि प्रसिद्धि केवल निजी सफलता का साधन नहीं, सामाजिक हस्तक्षेप का माध्यम भी बन सकती है।


नाना पाटेकर ने वर्ष 1978 में नीलकांति पाटेकर से विवाह किया। नीलकांति बैंक में अधिकारी के तौर पर काम कर चुकी थीं और थिएटर से भी जुड़ी थीं। नीलकांति की  अभिनय में खास दिलचस्पी थी और उन्होंने मराठी थिएटर में काम किया था। दोनों की मुलाकात थिएटर के दौरान हुई थी। बिना किसी बड़े खर्च के बिल्कुल साधारण ढंग दोनों की शादी हुई थी, उस विवाह में कुल खर्च महज ₹750 आया था।  दोनों के दो बेटे हुए दुर्वासा और मल्हार पाटेकर। बड़े बेटे दुर्वासा की मृत्यु लगभग तीन साल की उम्र में बीमारी के चलते हो गई थी। छोटे बेटे मल्हार फिल्ममेकिंग से जुड़े हुए हैं और अपने पिता के प्रोडक्शन से जुड़े काम भी संभालते रहे हैं। 

शादी के बाद बहुत वर्षों तक दोनों साथ रहे लेकिन बाद में अलग हो गये लेकिन कभी दोनों ने तलाक नहीं लिया और कोई आपसी मतभेद भी नहीं था। 

नाना पाटेकर उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। 1990 में ‘परिंदा’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद 1995 में ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप नारायण तिलक का उनका किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार पात्रों में गिना जाता है। 1997 में ‘अग्निसाक्षी’ के लिए नाना को एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस तरह उन्होंने अभिनय की तीन अलग-अलग भूमिकाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की।


नाना को केवल गंभीर और क्रोधपूर्ण भूमिकाओं तक सीमित करना भी उचित नहीं होगा। वर्ष 2007 की वेलकम में उदय शेट्टी का उनका किरदार इसका प्रमाण है। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से हास्य अभिनय में भी अलग पहचान बनाई। वेलकम का उदय शेट्टी और क्रांतिवीर का प्रताप नारायण तिलक बिल्कुल भिन्न चरित्र थे, लेकिन दोनों में नाना की प्रतिभा समान रूप से दिखाई देती थी।


यही बड़े अभिनेता की पहचान है कि वह अपने व्यक्तित्व को किरदार पर थोपने के बजाय किरदार को अपने भीतर उतार ले।उनके निर्देशन में बनी प्रहार ने सैन्य अनुशासन, सामाजिक मूल्यों और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर उनकी चिंताओं को अभिव्यक्ति दी। भारतीय सेना से उनका जुड़ाव केवल फिल्मी भूमिका तक सीमित नहीं रहा। उन्हें प्रादेशिक सेना में मानद अधिकारी का दर्जा भी मिला।


भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए सरकार ने वर्ष 2013 में नाना पाटेकर को पद्मश्री से सम्मानित किया। आधिकारिक पद्म पुरस्कार रिकॉर्ड में उनका नाम ‘श्री विश्वनाथ दिनकर पाटेकर उर्फ नाना पाटेकर’ के रूप में कला क्षेत्र में दर्ज है। 

आठ अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में नाना पाटेकर का गोवा में निधन हो गया। 

 उनका जीवन विरोधाभासों से मुक्त नहीं था। उनमें क्रोध भी था और करुणा भी, कठोरता भी थी और संवेदनशीलता भी।संभवतः इन्हीं विरोधाभासों ने उनके अभिनय को इतना मानवीय बनाया। नाना ने सिद्ध किया कि साधारण चेहरा, असाधारण प्रतिभा और जीवन के प्रति गहरी संवेदनशीलता किसी कलाकार को शिखर तक पहुंचा सकती है।


नाना पाटेकर का निधन केवल एक अभिनेता का जाना नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक ऐसे दौर का अंत है जिसने अभिनय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनकी आवाज,उनके डाइलोग,उनके किरदार की सादगी और गहराई, आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.

Monday, 28 September 2026

अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार की मौत, चालक फरार

 


दैनिक जनभारत जौनपुर । जिले के सरपतहां थाना क्षेत्र के बड़ौना मोड़ के पास रविवार की रात अज्ञात चार पहिया वाहन की टक्कर से बाइक सवार व्यक्ति की मौत हो गई। हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, कुसियां बाहर गांव निवासी राम सुभाष रविवार रात करीब 10:30 बजे रुधौली बाजार से बाइक से घर लौट रहे थे। बड़ौना मोड़ स्थित पानी की टंकी के पास पहुंचते ही पीछे से तेज रफ्तार में आए अज्ञात चार पहिया वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक क्षतिग्रस्त हो गई और राम सुभाष गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। बताया जा रहा है कि घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर फरार वाहन और चालक की पहचान करने में जुटी है।

Sunday, 27 September 2026

पेड़ हटाने को लेकर विवाद में तीन पर जानलेवा हमला, दंपती समेत तीन गिरफ्तार

 

दैनिक जनभारत जौनपुर । जनपद की शाहगंज तहसील के सरपतहां थाना क्षेत्र के मनवल गांव में रास्ते में गिरे पेड़ को हटाने को लेकर हुए विवाद में तीन लोगों पर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला करने का आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने रविवार को दंपती समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। 

पुलिस को दी गई तहरीर में गांव निवासी सुनीता पत्नी विजय शंकर ने आरोप लगाया कि शनिवार की सुबह करीब नौ बजे रास्ते में पेड़ गिर गया था। पेड़ हटाने की बात को लेकर महेंद्र उसकी पत्नी शीला और पुत्र रजनीश से विवाद हो गया। आरोप है कि तीनों ने लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से सुनीता, मंजू पत्नी दुदानाथ तथा ज्योति पुत्री विजय शंकर पर जान से मारने की नीयत eसे हमला कर दिया। हमले में तीनों के सिर में गंभीर चोटें आईं। परिजन डायल 108 से घायलों को अस्पताल ले गए, जहां उनका उपचार कराया गया।

 पुलिस के अनुसार मामले में वांछित मनवल निवासी महेंद्र (46), उसकी पत्नी शीला (45) और पुत्र रजनीश (26) को रविवार को करीब 11 बजे उनके घर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपितों के पास से एक लोहे की कुल्हाड़ी और एक लकड़ी का डंडा बरामद किया।

आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक मंजय यादव, कांस्टेबल नितीश कुमार, शिवम कुशवाहा और महिला कांस्टेबल शाहिनी शामिल रहीं।

लापता लाइब्रेरी संचालक का पेड़ से लटका मिला शव

दैनिक जनभारत जौनपुर। सरपतहां थाना क्षेत्र के भेला बस स्टॉप के पास कोटिला गांव स्थित बगीचे में रविवार सुबह पेड़ से युवक का शव लटका मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान ऊंचगांव निवासी संतोष गौतम (37) के रूप में हुई। वह जमौली गांव के कम्मरपुर मोड़ पर एसकेएस डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन करता था।



रविवार सुबह कोचिंग जा रहे बच्चों ने बगीचे में बेल के पेड़ से शव लटका देखा। जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। सूचना पर परिजन भी पहुंचे और शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया।

परिजनों के मुताबिक संतोष अपने पिता अलगू गौतम के दो पुत्रों में छोटा और अविवाहित था। वह 3 जुलाई की रात से घर से लापता था। परिजन अपने स्तर से उसकी तलाश कर रहे थे। घर से करीब तीन किलोमीटर दूर ढाई माह बाद उसका शव मिलने से परिवार में मातम छा गया।

सूचना पर पहुंची सरपतहां पुलिस ने शव को पेड़ से उतरवाकर कब्जे में लिया। नवागत क्षेत्राधिकारी प्रतिमा वर्मा ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों से जानकारी ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।





थानाध्यक्ष रामाश्रय राय के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है और प्रेम प्रसंग से जुड़े पहलू की भी जांच की जा रही है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

Friday, 25 September 2026

सेवा संकल्प अभियान के तहत हुई हेल्दी बेबी प्रतियोगिता

सुइथाकला। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा सेवा संकल्प अभियान सेवा के अंतर्गत शुक्रवार  को आंगनबाड़ी केन्द्र रामनगर में हेल्दी बेबी प्रतियोगिता एवं पोषण वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के दौरान अविभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण व सही विकास के बारे में जागरूक किया गया।  

प्रतियोगिता में तय मानकों पर पूरी तरह स्वस्थ पाए गए तीन बच्चों अल्पना, लाडो और अक्षत को हेल्दी बेबी चुनते हुए पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुपरवाइजर पुष्पा पाण्डेय,राजेश शुक्ला,भीम सिंह,राजेश सिंह,मोनू तिवारी, आंगनबाड़ी कार्यकत्री गरिमा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय महिलाएं व बच्चे उपस्थित रहे।



Sunday, 30 August 2026

IAS दिव्या मित्तल ने क्यों दिया इस्तीफा? IIT-IIM के बाद लंदन की हाई-सैलरी जॉब छोड़कर बनी थीं IAS




IAS Divya Mittal Story: 13 साल तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद दिव्या मित्तल ने IAS पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी और IAS बनने तक के सफर को याद किया।

हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से B.Tech और IIM बेंगलुरु से MBA किया है। इसके बाद उन्होंने लंदन में J.P. Morgan की हाई-पैकेज नौकरी की, लेकिन देश के लिए कुछ करने की इच्छा उन्हें वापस भारत ले आई।



दिव्या मित्तल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2012 अपने दूसरे प्रयास में पास की और 68वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं। इससे पहले वह UPSC के जरिए IPS अधिकारी भी चुनी गई थीं।

अपनी भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि लंदन में अच्छी नौकरी और सफलता हासिल करने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर रहना खलता था। उन्हें लगता था कि उनकी पढ़ाई और आत्मविश्वास पर इस मिट्टी का कर्ज है, जिसे चुकाना है। इसी सोच के साथ उन्होंने भारत लौटकर IAS अधिकारी बनने का फैसला किया।

IAS के तौर पर अपने अनुभव को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा सुकून तब मिला, जब किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा।



उन्होंने कहा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।

हालांकि, अपने इस्तीफे के पीछे उन्होंने कोई स्पष्ट व्यक्तिगत या प्रशासनिक कारण नहीं बताया है। उनका भावुक पोस्ट उनके 13 साल के प्रशासनिक सफर और आगे की नई दिशा की ओर इशारा करता है।

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Saturday, 29 August 2026

नाबालिग से यौन शोषण के आरोप में युवक गिरफ्तार, कोर्ट भेजा गया




दैनिक जनभारत (खेतासराय)। नाबालिग से यौन शोषण के मामले में फरार चल रहे आरोपी को खेतासराय पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे संबंधित न्यायालय में पेश किया।

थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान चौकिया गुरैनी निवासी अविनाश यादव के रूप में हुई है। उसके खिलाफ 20 अगस्त को पॉक्सो एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी।

शुक्रवार को पुलिस को मिली सूचना के आधार पर टीम ने दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, उपनिरीक्षक गुलाबचंद्र, हेड कांस्टेबल सलीम खान और कांस्टेबल सोनू गौड़ शामिल रहे।